कोइ नोकरी गरिबरेका ठुला
कोइ बिन सभ्यता का हुला
कोइ चाकरी गरि बरेका ठुला
कम जन सम्झ्या मुइ भया लै दुला !!
कोइ रोपाइँ खेतमा बस्याका कुला
कोइ सुदोइ चप्पल मलिबरे का ठुला
रुपैयाँ का ब मुइ सित नाइ हुन्ना पुला
कम जन सम्झ्या मुइ भया लै दुला !!
कोइ अर्खाका आडमा डकाद्द्या वाला
सेठका गुलाम, गरिब हकाद्या वाला
पेटमा कपट नाइ जाण्णु, मान्स होइग्यु खुला
कम जन सम्झ्या मुइ भया लै दुला !!
कोइ पापी धोखेबाज लड्डा का ठुला
बात होलि चोता किउस्या ल्युन्ना मुला
चम्चागिरीका थपोडा ब नाइ हुन्ना ठुला
कम जन सम्झ्या मुइ भया लै दुला !!
– शिवराज कलौनी
©® २०७७/४/२४
