बोल्न मन छैन अचेल, लेख्न मन छैन
रिस मात्र उठ्छ कोही देख्न मन छैन
कस्तो रहर कस्तो व्यथा थाहा पनि छैन
मनभरि चाहना छ खोज्न मन छैन
स्थिर छैन मन अचेल डुल्छ टाढाटाढा
दिक्क लाग्छ तर फेरि छेक्न मन छैन
आफ्नो जीवन सतही छ, रहर उकालीको
पाइला चाल्छु खुट्किलोमा टेक्न मन छैन
भौंतारिदा भौतारिदै कठ्याँग्रियो जीवन
कसैलाई न्यानो पारी सेक्न मन छैन ?
