
कि कहु मीत, जखन स्वाभिमान मरि जाइ छै
तखने ओ भितरिया, भगवान मरि जाइ छै ।
मायँक नोर लेल जे संघर्ष नही करैए
बुझु जे ओही मायक सन्तान मरि जाइ छै ।
जकरा लेल छोडलहुँ अपन दुनियादारी
बाकी किरहलैए जखन इमान मरि जाइ छै।
तोहर आ हमर भावमे लागल अछि, जेसभ
यौ जी, एहिनामे मनुखक पहिचान मरि जाइ छै।
(मैथिलीबाट नेपालीमा भावानुवाद)
के भनौँ साथी, जब स्वाभिमान मरेर जान्छ
त्यसै बेला त्यस भित्रको भगवान मरेर जान्छ ।
आमाको आँसुका लागि जो संघर्ष गर्दैन
बुझ्नुहोस् कि ती आमाको सन्तान मरेर जान्छ ।
जसको लागि छोडेँ मैले आफ्नो दुनियादारी
बाँकी नै रह्यो जब उसको इमान मरेर जान्छ ।
तिम्रो र मेरो भन्ने भावमा लागेको छ जो–जो
ओ हजुर, यस्तैमा मानवको पहिचान मरेर जान्छ ।
वास्तविक नाम गजेन्द्रकुमार राय
साहित्यिक नाम गजेन्द्र गजुर
हनुमाननगर कंकालीनी नगरपालिका– ९, सप्तरी
मोबाइल नम्बर – ९८६२९३१७८०, ९८१०४८८३४२
