कमल सन कोमल वदन पर
सजल मुण्डक हार हे
फुजल लट पवनसँग खेलैत
सिंह पर मैया सवार हे
एक हाथ खडग दोसर हाथ चक्र
त्रिशुल चमक कमाल हे
तीनु भूवन के संगही देखैत
नयन हुनक विशाल हे
घन–घन घुंघरुक खनक सँ
कापल भूत पिसाच हे
सुर संहारनी जगत कल्याणी
मोहिनी सुरत विराट हे
दुःख हरऽ ला सुख वर्षावऽ ला
लेने छथिन अपतार हे
हिम सन झल्कैत अद्वितीय सुन्दरी
अमृत भरल मुस्कान हे
सुधा मिश्र
जनकपुरधाम – ४
प्रदेश नं. २, धनुषा

सुन्दर रचना
राम्रो लाग्यो ।
Thanks
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