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सागर छथि गुरु (कविता)


बिनु शिंष्यके गुरुके कि पहिचान?
शिष्य स भेटैछैन हुनका मान
जगके बहुत छथि ज्ञानी गुमनाम
किया कि ओ नहि बटलथि ज्ञान

गुरु छथि सागर शिष्य बुंद एक
शिष्य बने सागर पाबि गुरुके भेट
बनाक शिष्य सुवास भरल फूल
गमैक जाति गुरु बहुत दूर दुर

कोना अँगुठा लेल गुरु दक्षिणा
कोना कहल कर्णके ओहन बतिया
गुरु त जरैत एक सत्य दीप
जहि स जग मग होय लाखौ मित

बडी विचित्र अछि गुरुके रीत
खोजिरहल छथि अपने शिष्य नित
महावीर कविर बुद्ध जनक
सभके अछि हृदय सS नमन

सुधा मिश्र
जनकपुरधाम – ४
प्रदेश नं. २, धनुषा

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