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बरको डाली नुहेर छोला कि


बरको डाली नुहेर छोला कि है लौ लौ रेसम लौ लौ
चौतारीमा मै बसो होलाकी है लौ लौ रेसम लौ लौ

पानी खान झरेको अहिले लौ लौ रेसम लौ लौ
पापी मन बुझाउने म केले लौ लौ रेसम लौलौ

ज्यान त सुक्यो कटुसको स्याउली झैँ लौ लौ रेसम लौ लौ
रुन्छ मन बनैको न्याउली झै लौ लौ रेसम लौलौ

रातभरि रिबन धोएर है लौ लौ रेसम लौ लौ
जाउँ तभन्दा मान्दिनौ बसहै रोएर लौ लौ रेसम लौ लौ

हातमा धडी नौ बजे दमदिने लौ लौ रेसम लौ लौ
मायालुलाई काँ पुगी सम्झिने लौ लौ रेसम लौ लौ
पानी परो चार दिशा घेरेर है लौ लौ रेसम लौ लौ
काँ बसेर रुँ धोको फेरेर है लौ लौ रेसम लौ लौ

स्व कर्णबहादुर माझी

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