हृदय सँ आहाक यादो जना दूर भेलै
जिन्गी भैरके सपना चकना चुर भेरै
एक एक मुस्कान जेना कुछ बता रहल य
राज यी छाती के मधुर छाउर भेलै
वाट चलैति दर्जनो मिलत आहाके
असगर कहानी त गजुर भेलै
हकन कानि धसल अखिँया
बुझि नहि पेलौ कि कसुर भेलै
आहा क पथ हमही जतन करै छि प्रिय
अही सुकुमारि गजेन्द्र त मजदुर भेलै
गजेन्द्र गजुर
हनुमाननगर-२सप्तरी
