डाह करे वाला अगाडि बढल होखे त कहS
स्नेह बाँटे वाला पिछाडी पडल होखे त कहS
टाँग खिचते रह जाई सब दिन टाँग खिंचे वाला
कामयाबी के सिंढी कहियो चढल होखे त कहS
पाप,निच कर्म यी सब महक जाई एक दिन
इमानदारी आ सँच्चाइ संडल होखे त कहS
कुछ हाँसिल करे के बा त प्यार से बोलS बतिआवS
बिना पेनी के लोटा मे पानी अडल होखे त कहS
दिपेन्द्र सहनी
बिरगंज, नेपाल
