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हमर पहिचान (कविता)

SudhaMishra


छी हम मैथिल, हमर मिथिला
सब सँ पुरान, हमर पहिचान
विदेहक नगरी, धिया जानकी
तँए छै मिथिला, सब सँ महान

बथुवा, तिलकोर, कर्मीक साग
मुंगवा, वर–वरी, पान, मखान
माछ, दही शुभ सगुनक भार
तँए छै मिथिला, सब सँ महान

धोती, कुर्ता, डोपटा, पाग, खराम
टीका, नथिया, बिछिया, कंगना हार
श्रद्धाक आँचर लय झापल माथ
तँए छै मिथिला, सब सँ महान

सोहर, सम्मरि, साँझ, पराती
जट–जटिन, समदाओन, उदासी
सभ किओ गाबथि गीत चुमान
तँए छै मिथिला, सब सँ महान

सुधा मिश्र
जनकपुरधाम – ४
प्रदेश नं. २, धनुषा

1 thought on “हमर पहिचान (कविता)”

  1. कति प्रिय लाग्ने । अाफूलाइ
    कति प्रिय लाग्ने । अाफूलाइ बाेल्न अाउन्न । बुझ्न चै‌ सबे सर्लक्क बुझिन्छ । कविताका लागि नानुलाइ बधाई ।

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