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काल्हि केय देखलकैय (कविता)


चलु जीव लिय आई
काल्हि केय देखलकैय

महलक धीया
महलक पुतौह
रने वने फिरलैय

चलु जीव लिय आई
काल्हि केय देखलकैय

पतिक सामु
परिवार आगु
अपने चीर हरलकैय

चलु जीव लिय आई
काल्हि केय देखलकैय

द्वेष धोइत
पाप पखारैत
गंगा मलिन भेलैय

चलु जीव लिय आई
काल्हि केय देखलकैय

सुधा मिश्र
जनकपुरधाम-४,धनुषा
नेपाल

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