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हृदय सँ आहाक (मैथिली गजल)


हृदय सँ आहाक यादो जना दूर भेलै
जिन्गी भैरके सपना चकना चुर भेरै

एक एक मुस्कान जेना कुछ बता रहल य
राज यी छाती के मधुर छाउर भेलै

वाट चलैति दर्जनो मिलत आहाके
असगर कहानी त गजुर भेलै

हकन कानि धसल अखिँया
बुझि नहि पेलौ कि कसुर भेलै

आहा क पथ हमही जतन करै छि प्रिय
अही सुकुमारि गजेन्द्र त मजदुर भेलै

गजेन्द्र गजुर
हनुमाननगर-२सप्तरी

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