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भाइ के हाथ बन्हबै राखी (कविता)


एहि धरती पर एकेटा चान
भाइ सन नहि केउ आन

सभ्य, शुन्दर, चंचल, विवेकी
भावक गुणी, कर्मठ आ सेवी
छै राखी भाइ के बन्हबै हाथ
तरबै तिलकोर आ लगेबै पान

सामा–चकेबा, भरद्वितिया, राखी
भैया सन पाहुन इजोरिया राति
यज्ञ, पाठ, पूजा करबै खुब दान
दीर्घायू लेल हम मंगबै वरदान

सुधा मिश्र
जनकपुरधाम – ४
प्रदेश नं. २, धनुषा

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