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चारिटा मैथिली हाइकु – १७ (मगरमच्छ)

20200514_BinitThakur-Haiku


६५.
चलैत लू मे
अकुलायल मोन
ठंढ़ा शर्बत ।

६६.
मगरमच्छ
दयालु साधू लग
बहाबे नोर ।

६७.
महा–भूकम्प
डोलल हिमालय
देशक छति ।

६८.
ठोस मचान
लतरल पान मे
साँपक बास ।

विनीत ठाकुर
मिथिला बिहारी नगरपालिका
मिथिलेश्वर मौवाही – ३
धनुषा, प्रदेश नं. – २

मिथिलाक्षर (तिरहुता) दुनु लिपिमे प्रकाशित कृति ‘वसुन्धरा’ हाइकु संग्रह सँ साभार :

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